स्वामी विवेकानन्द का शिकागो व्याख्यान

प्रस्तुत व्याख्यान माननीय प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने ११ सितम्बर, २०१८ को रामकृष्ण मिशन, कोयम्बटूर में रामकृष्ण मठ द्वारा आयोजित स्वामी विवेकानन्द के शिकागो भाषण की १२५वीं वर्षगाँठ के समापन समारोह में वीडियो कांफ्रेंस के द्वारा प्रदान किया था।

स्वामी विवेकानन्द के शिकागो भाषण की १२५वीं वर्षगाँठ समारोह में उपस्थित होकर मैं स्वयं को सौभाग्यशाली मानता हूँ। मुझे बताया गया है कि यहाँ लगभग ४००० युवा मित्र, और वरिष्ठ जन उपस्थित हैं । संयोग से १२५ वर्ष पहले शिकागो में जब स्वामी विवेकानन्द जी ने विश्व-धर्म-संसद में भाषण दिया था, तब श्रोताओं में लगभग ४००० व्यक्ति उपस्थित थे। मुझे एक महान और प्रेरक भाषण की वर्षगाँठ मनाने का कोई दूसरा उदाहरण मालूम नहीं है। इसलिए यह समारोह स्वामीजी के भाषण के प्रभाव को दिखाता है। यह दिखाता है कि इस भाषण ने किस तरह भारत के प्रति पश्चिम की दृष्टि को बदल दिया और कैसे भारतीय विचार और दर्शन को अपना उचित स्थान मिला। आपके द्वारा आयोजित यह समारोह शिकागो भाषण की वर्षगाँठ को और अधिक विशेष बनाता है। श्रीरामकृष्ण मठ तथा मिशन से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति, तमिलनाडु सरकार और यहाँ उपस्थित अपने हजारों युवा मित्रों को बधाई देता हूँ कि वे इस ऐतिहासिक भाषण के स्मृति समारोह का हिस्सा बनने के लिये यहाँ उपस्थित हैं। यहाँ सात्त्विक गुणों वाले संतों और युवा लोगों की ऊर्जा और उत्साह का मिलन भारत की असली शक्ति का प्रतीक है। मैं आपसे दूर होकर भी इस अनूठी ऊर्जा को महसूस कर सकता हूँ। आप इस दिन को मात्र भाषणों तक सीमित नहीं रखेंगे। स्वामीजी के शब्दों को प्रसारित करने के लिए मठ ने अनेक कार्यक्रम प्रारम्भ किए हैं। स्कूलों और कॉलेजों में प्रतियोगिताएँ आयोजित की गई हैं। हमारे युवा लोग महत्त्वपूर्ण विषयों पर चर्चा करेंगे और आज की भारत की चुनौतियों के समाधान का प्रयास करेंगे। जन-भागीदारी की यह भावना, देश की चुनौतियों से जूझने का यह संकल्प और एक भारत, श्रेष्ठ भारत का यह दर्शन स्वामीजी के संदेश का सार है।

मित्रो! स्वामी विवेकानन्द ने अपने भाषण के माध्यम से पूरे विश्व को भारतीय संस्कृति, दर्शन और प्राचीन परम्पराओं की रोशनी प्रदान की। शिकागो भाषण के बारे में अनेक लोगों ने लिखा है। आपने भी आज अपनी चर्चा के दौरान उनके भाषण के महत्त्वपूर्ण बिन्दुओं पर बात की। हम स्वामीजी के शब्दों को दोहराते रहेंगे और उनसे नई बातें सीखेंगे। मैं उनके भाषण के प्रभाव को बताने के लिए स्वामीजी के ही शब्दों का उपयोग करूँगा। चेन्नई में एक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा कि शिकागो-धर्म-संसद भारत और भारतीय विचारों के लिए अपार सफलता थी। इससे वेदान्त के ज्वार को मदद मिली और यह विश्व में प्रवाहित हो रहा है। मित्रो ! यदि आप स्वामीजी के कालखण्ड को याद करें, तो उनकी उपलब्धियों के आकार और व्यापक दिखेंगे। हमारा देश विदेशी शासन के शिकंजे में था। हम गरीब थे। हमारे समाज को पिछड़ा रूप में देखा जाता था और वास्तव में अनेक सामाजिक बुराइयाँ थीं, जो हमारे सामाजिक ताने-बाने का हिस्सा हो गई थीं। विदेशी शासक, उनके न्यायाधीश, उनके उपदेशक हमारे हजारों वर्षों के ज्ञान और सांस्कृतिक विरासत को नीचा दिखाने का कोई अवसर नहीं गँवाते थे। हमें अपने लोगों को, अपनी विरासत को नीचा देखने की शिक्षा दी गई। हमें अपनी जड़ों से काट दिया गया। स्वामीजी ने इस सोच को चुनौती दी। उन्होंने शताब्दियों की धूल को साफ करने का बीड़ा उठाया, जो भारतीय संस्कृति के ज्ञान और दार्शनिक विचार पर जम गई थी। उन्होंने विश्व को वैदिक दर्शन की श्रेष्ठता बताई। उन्होंने शिकागो में विश्व को वैदिक दर्शन का ज्ञान दिया और देश के समृद्ध अतीत और अपार क्षमता की भी याद दिलाई। उन्होंने दिलाया हमें खोया हुआ विश्वास, अपना गर्व और अपने मूल श्रोत से जोड़ा। स्वामीजी ने हम सबको याद दिलाया कि यह वह धरती है, जहाँ से आध्यात्मिकता और दर्शन समुद्री ज्वार की तरह बार-बार उभरते हैं और विश्व को जल-प्लावित करते हैं। यह वह धरती है, जहाँ से मानवता की गिरती नस्लों में जीवन और शक्ति लाने के ज्वार उठते हैं। स्वामी विवेकानन्द ने न केवल विश्व पर अपनी छाप छोड़ी, बल्कि देश के स्वतन्त्रता आन्दोलन को नई ऊर्जा और नया विश्वास भी दिया। उन्होंने देश के लोगों में ‘हम कर सकते हैं’, ‘हम सक्षम हैं’ की भावना जागृत की। आत्मविश्वास युवा-संन्यासी के खून के प्रत्येक बूँद में था। उन्होंने देश को यह आत्मविश्वास दिया। उनका मंत्र था –‘स्वयं में विश्वास करो, देश को प्यार करो।’ मित्रो! स्वामी विवेकानन्द जी के इस विजन के साथ भारत पूरे विश्वास से आगे बढ़ रहा है। यदि हम अपने आप में विश्वास करें तथा कठिन परिश्रम का प्रण करें, तो हम क्या नहीं प्राप्त कर सकते!

विश्व ने माना है कि भारत के पास योग और स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद की सदियों पुरानी परम्परा है। इसके साथ ही भारत आधुनिक टेक्नोलॉजी की शक्ति का उपयोग कर रहा है। आज भारत एक बार में १०० उपग्रह लांच कर रहा है। विश्व समुदाय मंगलयान और गगनयान की बातें कर रहा है। दूसरे देश भीम जैसे ऐप विकसित कर रहे हैं। इससे देश के आत्मविश्वास में बढ़ोत्तरी होती है। हम गरीबों और वंचितों के आत्मविश्वास को बढ़ाने के लिए कठिन परिश्रम कर रहे हैं। इस प्रयास का प्रभाव हमारे युवाओं और हमारी बेटियों के आत्मविश्वास में देखा जा सकता है। हाल में एशियाई खेलों में हमने देखा कि इस बात का कोई प्रभाव नहीं पड़ता कि आप कितने गरीब हैं या आप किस परिवार से आते हैं। अपने आत्मविश्वास और कठिन परिश्रम के जरिए आप अपने देश को गौरव प्रदान कर सकते हैं। आज देश में कृषि उत्पादन रिकॉर्ड स्तर पर है। इसमें हमारे किसानों का समान दृष्टिकोण दिखाई पड़ता है। उद्योगजगत के व्यक्ति और हमारे कामगार औद्योगिक उत्पादन में वृद्धि कर रहे हैं। युवा इंजीनियर, उद्यमी और वैज्ञानिक देश को नवाचार की नई क्रान्ति की ओर ले जा रहे हैं। मित्रो! स्वामीजी का पूर्ण विश्वास था कि भारत का भविष्य युवाओं पर निर्भर है । वेद को उद्धृत करते हुए उन्होंने कहा था कि युवा, शक्तिशाली, स्वस्थ और तीक्ष्ण बुद्धि वाला भगवान के पास पहुँचेगा । मुझे इस बात की प्रसन्नता है कि आज का युवा संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। युवाओं की आकांक्षाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने एक नई कार्यप्रणाली और एक नया दृष्टिकोण सामने रखा है। स्वतन्त्रता के ७० सालों के बाद हमारे युवाओं में अनेक ऐसे हैं, जिनके पास रोजगार प्राप्त करने लायक कौशल नहीं है । हालांकि साक्षरता में वृद्धि हुई है, लेकिन हमारी शिक्षा व्यवस्था ने कौशल विकास पर विशेष ध्यान नहीं दिया है । युवाओं के लिए कौशल विकास के महत्त्व को समझते हुए सरकार ने कौशल विकास के लिए एक पृथक् मंत्रालय का गठन किया है । इसके अलावा हमारी सरकार ने उन युवाओं के लिए बैंकों के दरवाजे खोल दिए हैं, जो अपने बल पर अपने सपने को पूरा करना चाहते हैं । मुद्रा योजना के तहत अब तक १३ करोड़ लोगों को ऋण दिए गए हैं । इस योजना ने देश के गाँवों और शहरों में स्व-रोजगार को बढ़ाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है । स्टार्टअप इंडिया अभियान के तहत नवोन्मेष विचारों के लिए सरकार ने उपयुक्त मंच प्रदान किए हैं। परिणामस्वरूप पिछले वर्ष ८००० स्टार्टअप को मान्यता प्रमाण-पत्र प्राप्त हुए, जबकि २०१६ में यह संख्या ८०० थी। इसका अर्थ यह है कि एक वर्ष के दौरान दस गुनी वृद्धि हुई। विद्यालयों में नवोन्मेष के वातावरण के निर्माण के लिए ‘अटल इनोवेशन मिशन’ की शुरुआत की गई है। इस योजना के अन्तर्गत अगले पाँच वर्षों में पूरे देश में ५००० अटल थिंकग लैब की स्थापना की जाएगी। नवोन्मेषी विचारों को आगे लाने के लिए स्मार्ट इंडिया जैसे कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

मित्रो! स्वामी विवेकनन्द ने हमारे सामाजिक-आर्थिक समस्याओं के बारे में भी विचार व्यक्त किए हैं। उन्होंने कहा था कि समाज में समानता तब होगी, जब हम गरीबों में से सर्वाधिक गरीब को सर्वोच्च स्थान पर बैठे व्यक्ति के समकक्ष बिठा देंगे। पिछले चार वर्षों से हम इस दिशा में कार्य कर रहे हैं। जन-धन खातों और इंडिया पोस्ट पेमेंट बैंक के माध्यम से बैंकों को गरीबों के घर के दरवाजे तक पहुँचा दिया गया है। गरीबों में से सर्वाधिक गरीब को सहायता प्रदान करने के लिए आवास, गैस और बिजली कनेक्शन, स्वास्थ्य और जीवन बीमा जैसी योजनाओं को लागू किया गया है। इस महीने की २५ तारीख को हम पूरे देश में आयुष्मान भारत योजना का शुभारम्भ करने जा रहे हैं। इस योजना के तहत १० करोड़ से अधिक गरीब परिवारों को गंभीर बीमारियों के नि:शुल्क इलाज के लिए ५ लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता सुनिश्चित की जाएगी। मैं तमिलनाडू सरकार और यहाँ के लोगों को इस योजना से जुड़ने के लिए बधाई देता हूँ। हमारा दृष्टिकोण सिर्फ गरीबी को समाप्त करना नहीं है, बल्कि देश में गरीबी के कारणों को जड़ से समाप्त करना है।

मैं आपको याद दिलाना चाहता हूँ कि आज का दिन एक अन्य प्रकार की घटना की याद दिलाता है, वह है ९/११ की आतंकवादी घटना। इस घटना ने पूरे विश्व को प्रभावित किया था। राष्ट्र समुदाय इस समस्या का समाधान ढूँढ़ने का प्रयास कर रहा है। सचमुच इस समस्या का हल स्वामीजी द्वारा शिकागो में दिखाए गए मार्ग सहिष्णुता और स्वीकार्यता में है। स्वामीजी कहते थे कि मुझे इस बात का गर्व है कि मैं ऐसे धर्म का अनुयायी हूँ जिसने पूरे विश्व को सहिष्णुता और सार्वकालिक स्वीकार्यता का संदेश दिया है। मित्रो! हमारा देश स्वतन्त्र विचारों का देश है। सदियों से हमारी धरती विभिन्न विचारधाराओं और संस्कृतियों की स्थली रही है। विचार-विमर्श करना और निर्णय लेना हमारी परम्परा रही है। लोकतन्त्र और वाद-विवाद हमारे मूल्य रहे हैं। किन्तु इसका अर्थ यह नहीं है कि हमारा समाज हर तरह की बुराइयों से मुक्त हो गया है। अनूठी विभिन्नताओं वाले इस विशाल देश के समक्ष कई बड़ी चुनौतियाँ हैं। स्वामी विवेकानन्द कहा करते थे कि सभी युगों में कमोबेश सभी जगह दुष्ट व्यक्ति रहा करते थे। हमें समाज के इन दुष्ट व्यक्तियों से सावधान रहना और उन्हें पराजित करना है। हमें यह याद रखना चाहिए कि सभी संसाधनों के होने के बाद भी भारतीय समाज में विभाजन हुआ है, आन्तरिक संघर्ष हुए हैं और बाहरी दुश्मनों ने इस स्थिति का फायदा उठाया है। इन संघर्षों के दौर में हमारे संतों और समाज-सुधारकों ने हमें सही रास्ता दिखाया है। यह रास्ता हमें एक साथ मिल-जुलकर रहने का संदेश देता है। स्वामी विवेकानन्द की प्रेरणा से हमें एक नये भारत का निर्माण करना है। आप सभी को धन्यवाद देने के साथ ही मैं अपना संबोधन समाप्त करता हूँ। आपने मुझे इस ऐतिहासिक कार्यक्रम में शामिल होने का सुअवसर प्रदान किया। स्कूल और कॉलेज के उन हजारों मित्रों को बधाई, जो स्वामीजी के संदेश को पढ़ते हैं, समझते हैं तथा प्रतियोगिताओं में भाग लेते हैं और पुरस्कार जीतते हैं। आप सभी को एक बार फिर धन्यवाद।

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