श्री गणेश जी की आरती

नमामि देवं द्विरदाननं तं यः सर्वविघ्नं हरते जनानाम्
धर्मार्थ कामन्स्तनुतेखिलानां तस्मै नमो विघ्नविनाशनाय
कृपानिधे ब्रह्ममयाय देव विश्वात्मने विश्वविधानदक्ष
विश्वस्य बिजाय जगन्मयाय त्रैलोक्यसंहारकृते नमस्ते
त्रयीमयायाखिलबुद्धिदात्रे बुद्धिप्रदीपाय सुराधिपाय
नित्याय सत्याय च नित्यबुद्धे नित्यं निरीहाय नमोस्तु नित्यं

मैं उन भगवान गजानन गणेशजी को प्रणाम करता हूँ, जो लोगों के सम्पूर्ण विघ्नोंका हरण करते हैं। जो सबके लिए धर्म, अर्थ और कामकी उपलब्धि कराते हैं, उन विघ्नविनाशक को नमस्कार है। हे कृपानिधान! हे विश्वका विधान करनेमें दक्ष! आप ब्रह्ममय, विश्वात्मा, विश्वके बीजरूप, जगन्मय, त्रैलोक्यका संहार करनेवाले हैं; हे देव! आपको नमस्कार है। वेदत्रयीस्वरूप, अखिल बुद्धिदाता, बुद्धिप्रदीप, सुरेश्वर, नित्य, सत्य, नित्यबुद्ध, नित्य निष्काम आपको नित्य नमस्कार है।

श्रोत: गणेशपुराण1

  1. कल्याण, सितम्बर 2018

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